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brij bhasha special tesu ke khel । tesu ke lokgeet

काव्य चर्चा

ब्रजभाषा विशेष: जानें ब्रज में खेले जाने वाले टेसू खेल और उनके गीत के बारे में

रैना पालीवाल

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ब्रज में अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से दशहरा तक और कई क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा तक टेसू-झांझी खेले जाते हैं। बरसों से यह लोक परंपरा चली आ रही है। यह बच्चों का प्यारा खेल है। दिन ढलते ही लड़कियां हाथों में झांझी और लड़के टेसू लेकर घर-घर जाते हैं और लोक गीत गाते हैं। लोग उन्हें कुछ न कुछ उपहार स्वरूप देते हैं।  

झांझी के उरकन बुरकन लाल मोती पाए जी 
वो मोती मैंने सास ऐ जाय दिखाए जी 
सास निपूती नै धर पत्थर पै फोरे री
फूटे फुटाए मैंने मैया ऐ जाय दिखाए री 
मैया बिचारी नै गंगा जमुना बहाए जी 
गंगा सी मेरी माहिल कहिये, कमल फूल भौजाई जी 
कारे कारे देवर कहिए कंजरिया दौरानी 
गोरे गोरे भइया कहिए कन्नफूल भौजइया 

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टेसू बड़े कमल के फूल

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