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Basti shayari

काव्य चर्चा

बसती हुई बस्ती पर शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वो बस्ती भी इक बस्ती थी ये बस्ती भी इक बस्ती है
वहाँ टूट के दिल जुड़ जाते थे यहाँ कोई ख़याल नहीं होता
- हिलाल फ़रीद


दिल का उजड़ना सहल सही बसना सहल नहीं ज़ालिम
बस्ती बसना खेल नहीं बसते बसते बस्ती है
- फ़ानी बदायुनी

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