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Bashir badr top sher collection

काव्य चर्चा

आम आदमी के शायर बशीर बद्र के ख़ास शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बशीर बद्र आसान लफ़्ज़ों में गहरी बात कहने वाले सुखन के उस्ताद हैं। गाहे-बगाहे उनके शेर संसद में नेताओं की आवाज़ बनते हैं तो कभी किसी माशूक के दिल का हाल बयां करते हैं। 15 फरवरी 1936 को पैदा हुए उर्दू अदब के इस सितारे को 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। पढ़ें आम आदमी के शायर बशीर बद्र के ख़ास शेर

बे-वक़्त अगर जाऊंगा सब चौंक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा


उदासी पत-झड़ों की शाम ओढ़े रास्ता तकती
पहाड़ी पर हज़ारों साल की कोई इमारत सी आगे पढ़ें

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