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आवाज़ शायरी

काव्य चर्चा

आवाज़ की बुलंदी ओ अहमियत बताते शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अगर आम जनता अपनी आवाज़ उठा ले तो सत्ता पलट सकती है। हिंसा, अन्याय के ख़िलाफ़ यदि मिलकर आवाज़ उठाई जाए तो वह शक्ति उत्पन्न करती है। लेकिन अगर यही आवाज़ बिखर जाए तो शोर भी पैदा कर सकती है। इस पर शायरों ने अपने अशआर कुछ यूं लिखे हैं। 


सुना है शोर से हल होंगे सारे मसअले इक दिन
सो हम आवाज़ को आवाज़ से टकराते रहते हैं
- नोमान शौक़


हर शख़्स यहाँ गुम्बद-ए-बे-दर की तरह है
आवाज़ पे आवाज़ दो सुनता नहीं कोई
- मोहसिन ज़ैदी

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