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'अंधेरे' पर कहे गए चुनिंदा शेर...

काव्य चर्चा

'अंधेरे' पर कहे गए चुनिंदा शेर...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है 
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से 
- एहतिशाम अख्तर

अँधेरे चारों तरफ़ सांय-सांय करने लगे
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे 

तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर 
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे
- राहत इन्दौरी आगे पढ़ें

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