उर्दू शायरी को नर्म और नाज़ुक अहसास अता करने वाले शायर अहमद फ़राज़ के शेर...

उर्दू शायरी को नर्म और नाज़ुक अहसास अता करने वाले शायर अहमद फ़राज़ के शेर...
                
                                                             
                            तरक्की पसंद शायरी के दौर में जिस एक शायर ने मूल लहजे को बजिद नहीं छोड़ा और तमाम उम्र ग़ज़ल की नाज़ुक मिज़ाजी से मुतासिर रहा, अहमद फ़राज़ शायरी में उसी शख़्सियत का नाम है। फ़ैज़ के गम-ए- दौरां अपने गम-ए-जानां की एक अलहद और पुरकशिश दुनिया बनाकर फ़राज़ ने उर्दू शायरी को एक बहुत नर्म और नाज़ुक अहसास अता करने के साथ ही ग़ज़ल जिसका मतलब ही माशूका से गुफ़्तगू करना होता है उसे नए अंदाज़ दिए। 
                                                                     
                            

दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है 
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता 

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा 
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा 

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ 
क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ  आगे पढ़ें

1 month ago

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