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aaj ka shabd pallav

काव्य चर्चा

आज का शब्द - पल्लव और महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- पल्लव जिसका अर्थ है नए पत्ते। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अपनी कविता 'पथ आंगन पर रख कर आयी' में इस शब्द का प्रयोग करते हैं। 

पल्लव - पल्लव पर हरियाली फूटी, लहरी डाली-डाली,
बोली कोयल, कलि की प्याली मधु भरकर तरु पर उफनाई।

झोंके पुरवाई के लगते, बादल के दल नभ पर भगते,
कितने मन सो-सोकर जगते, नयनों में भावुकता छाई।

लहरें सरसी पर उठ-उठकर गिरती हैं सुन्दर से सुन्दर,
हिलते हैं सुख से इन्दीवर, घाटों पर बढ़ आई काई।

घर के जन हुये प्रसन्न-वदन, अतिशय सुख से छलके लोचन,
प्रिय की वाणी का आमन्त्रण लेकर जैसे ध्वनि सरसाई।
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