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aaj ka shabd nirjhar

काव्य चर्चा

आज का शब्द - निर्झर जिसे कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना अपनी कविता में यूं लिखते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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'हिंदी हैं हम' की श्रृंखला में आज का शब्द है - निर्झर जिसका अर्थ है झरना या प्रपात। इस शब्द को कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने अपनी कविता 'प्यार' में यूं प्रयोग किया है। 

इस पेड़ में
कल जहां पत्तियां थीं
आज वहां फूल हैं
जहां फूल थे
वहां फल हैं
जहां फल थे
वहां संगीत के
तमाम निर्झर झर रहे हैं
उन निर्झरों में
जहां शिला खंड थे
वहां चांद तारे हैं
उन चांद तारों में
जहां तुम थीं
वहां आज मैं हूं
और मुझमें जहां अंधेरा था
वहां अनंत आलोक फैला हुआ है
लेकिन उस आलोक में
हर क्षण
उन पत्तियों को ही मैं खोज रहा हूं
जहाँ से मैंने- तुम्हें पाना शुरु किया था!
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