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आज का शब्द- गज और श्याम नारायण पाण्डेय के महाकाव्य हल्दीघाटी से चुनिंदा अंश

काव्य चर्चा

आज का शब्द- गज और श्याम नारायण पाण्डेय के महाकाव्य हल्दीघाटी से चुनिंदा अंश 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गज, जिसका अर्थ है- हाथी, दिग्गज, दीवार के नीचे का पुश्ता, आठ की संख्या और महिषासुर का पुत्र। प्रस्तुत है श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित महाकाव्य 'हल्दीघाटी' के 12 वें सर्ग से चुनिंदा अंश...

निर्बल बकरों से बाघ लड़े 
भिड़ गये सिंह मृग–छौनों से। 
घोड़े गिर पड़े गिरे हाथी 
पैदल बिछ गये बिछौनों से॥1॥ 

हाथी से हाथी जूझ पड़े 
भिड़ गये सवार सवारों से। 
घोड़ों पर घोड़े टूट पड़े
तलवार लड़ी तलवारों से॥2॥ 

हय–रूण्ड गिरे, #गज–मुण्ड गिरे
कट–कट अवनी पर शुण्ड गिरे। 
लड़ते–लड़ते अरि झुण्ड गिरे 
भू पर हय विकल बितुण्ड गिरे॥3॥  आगे पढ़ें

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