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aaj ka shabd durooh

काव्य चर्चा

आज का शब्द - दुरूह और धर्मवीर भारती की कविता

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' श्रृंखला में आज का शब्द है 'दुरूह' जिसका अर्थ है कठिन। धर्मवीर भारती की कविता 'टूटा पहिया' में इस शब्द का प्रयोग किया गया है। 

मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया हूं
लेकिन मुझे फेंको मत। 

क्या जाने कब
इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाए।

अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी
बड़े-बड़े महारथी
अकेली निहत्थी आवाज़ को
अपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहें
तब मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया
उसके हाथों में
ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूं 
मैं रथ का टूटा पहिया हूं

लेकिन मुझे फेंको मत
इतिहासों की सामूहिक गति
सहसा झूठी पड़ जाने पर
क्या जाने
सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले।
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