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5 love poetry on valentine day

काव्य चर्चा

मोहब्बत के अंजुमन में डूबे ये 5 बड़े कलाम...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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प्रेम दिवस पर काव्य चर्चा के तहत हम अपने पाठकों के लिए इश्क़ का गहरा अहसास लिए यह 5 बड़े कलाम, पेश कर रहे हैं 

करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे
ग़ज़ल बहाना करूँ और गुनगुनाऊँ उसे

वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे

ये लोग तज़्किरे करते हैं अपने लोगों के
मैं कैसे बात करूँ अब कहाँ से लाऊँ उसे

मगर वो ज़ूद-फ़रामोश ज़ूद-रंज भी है
कि रूठ जाए अगर याद कुछ दिलाऊँ उसे

वही जो दौलत-ए-दिल है वही जो राहत-ए-जाँ
तुम्हारी बात पे ऐ नासेहो गँवाऊँ उसे

जो हम-सफ़र सर-ए-मंज़िल बिछड़ रहा है 'फ़राज़'
अजब नहीं है अगर याद भी न आऊँ उसे


- अहमद फ़राज़

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