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तुम्हारा शहर और गलियां, वहीं छोड़ आया हूं : तजिंदर सिंह 

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                            तुम्हारा शहर और गलियां, वहीं छोड़ आया हूं 
                                                                                                

मैं अपनी जिंदगी की राहें मोड़ आया हूं 

तुम्हारी गली अब तो, बहुत गुलजार हुई होगी 
मैं अपनी चाहतों का समंदर, वहां छोड़ आया हूं 

तुम्हारी किताब से उस दिन, इक सफहा गिरा था 
जानती हो मैंने, उसे संभाल रखा है 

तुम भूल गई मुझको, मैं नहीं भूला 
तसव्वुर में तुम्हारा, कितना ख्याल रखा है 

उस भीड़ में आखिर मुझे तुमने समझा-जाना था 
उस हौसला अफजाई का गुमान, मैंने अब भी पाल रखा है 

तुम भूल गई मुझको, मैं नहीं भूला, 
तसव्वुर में तुम्हारा कितना ख्याल रखा है 
5 months ago

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