यश मालवीय की कविता: तनिक न पहले जैसे हो

यश मालवीय की कविता: तनिक न पहले जैसे हो
                
                                                             
                            कहो सदाशिव कैसे हो
                                                                     
                            
कितने बदल गए कुछ दिन में
तनिक न पहले जैसे हो

खेत और खलिहान बताओ
कुछ दिल के अरमान बताओ
ऊँची उठती दीवारों के
कितने कच्चे कान बताओ
चुरा रहे मुँह अपने से भी
समझ न आता ऐसे हो

झुर्री-झुर्री गाल हो गए
जैसे बीता साल हो गए
भरी तिजोरी सरपंचों की
तुम कैसे कंगाल हो गए
चुप रहने में अब भी लेकिन
तुम वैसे के वैसे हो आगे पढ़ें

1 month ago

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