संतोष चौबे की कविता: आना जब मेरे अच्छे दिन हों

संतोष चौबे की कविता
                
                                                             
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आना
जब मेरे अच्छे दिन हों.
जब दिल में
निष्कपट ज्योति की तरह
जलती हो
तुम्हारी क्षीण याद
और नीली लौ की तरह
कभी कभी
चुभती हो इच्छा.
जब मन के
अछूते कोने में
सहेजे तुम्हारे चित्र पर
चढ़ी न हो
धूल की परत
आना जैसे बारिश में अचानक
आ जाए
कोई अच्छी सी पुस्तक हाथ
या कि गर्मी में
छत पर सोते हुए
दिखे कोई अच्छा सा सपना। आगे पढ़ें

1 month ago

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