विज्ञापन

सच्चिदानंद प्रेमी की कविता: किसको कैसे पीर दिखाऊँ

सच्चिदानंद प्रेमी की कविता: किसको कैसे पीर दिखाऊँ
                
                                                                                 
                            किसको कैसे पीर दिखाऊँ?
                                                                                                

अंतर्मन में घाव बहुत हैं,
अनचाहत के भाव बहुत हैं ;
दूर-दृष्टि पर घना अँधेरा
कैसे जग को मर्म बताऊँ?

आंधी-ओला डेरा डाले,
हुआ बसेरा तमस हवाले,
तारे सभी तिरोहित नभ में
आगे कैसे पाँव बढ़ाऊँ?

अपने भी जब छोड़ चले हैं,
रिश्ते नाते तोड़ चले हैं,
करुणा-ममता मोड़ चले हैं
किससे फिर अब प्रीत लगाऊँ? आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X