नन्दकिशोर आचार्य की कविता 'भाषा से प्रार्थना'

nand kishore acharya hindi kavita bhasha se prarthna
                
                                                             
                            एक शब्द है - 'है'
                                                                     
                            
बेकल है 
भाषा ख़ुद जिसके लिए

वह कैसे जानेगा 
क्या होता है
भाषा में 'था' होना!

'वह' - एक शब्द है
एक शब्द है - 'तुम'
भाषा से मेरी
बस यही प्रार्थना है
'तुम' को 'वह' न कहना पड़े

इसलिए खोजने दो
अपने में 
अपने मैं को मुझे -
शब्द है 
वह भी। 

साभार - पचास कविताएं
वाणी प्रकाशन 
1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X