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कुंवर नारायण: रात मीठी चांदनी है, मौन की चादर तनी है

कुंवर नारायण: रात मीठी चांदनी है, मौन की चादर तनी है।
                
                                                                                 
                            रात मीठी चांदनी है,
                                                                                                

मौन की चादर तनी है,

एक चेहरा ? या कटोरा सोम मेरे हाथ में
दो नयन ? या नखतवाले व्योम मेरे हाथ में?

प्रकृति कोई कामिनी है?
या चमकती नागिनी है?

रूप- सागर कब किसी की चाह में मैले हुए ?
ये सुवासित केश मेरी बांह पर फैले हुए: आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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