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जयशंकर प्रसाद: कितने दिन जीवन जल-निधि में

जयशंकर प्रसाद: कितने दिन जीवन जल-निधि में
                
                                                                                 
                            कितने दिन जीवन जल-निधि में
                                                                                                

विकल अनिल से प्रेरित होकर
लहरी, कूल चूमने चल कर
उठती गिरती सी रुक-रुक कर
सृजन करेगी छवि गति-विधि में !
कितनी मधु- संगीत- निनादित
गाथाएँ निज ले चिर-संचित
तस्ल तान गावेगी वंचित  !
पागल - सी इस पथ निरवधि में!
दिनकर हिमकर तारा के दल
इसके मुकुर वक्ष में निर्मल
चित्र बनायेंगे निज चंचल !
आशा की माधुरी अवधि में !
1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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