आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

'आज़ादी का दिन मना रहा हिन्दोस्तान', पढ़ें स्वतंत्रता दिवस विशेष कविताएं

independence day special hindi kavita
                
                                                                                 
                            15 अगस्त / महावीर प्रसाद ‘मधुप’
                                                                                                


धन्य सुभग स्वर्णिम दिन तुमको
धन्य तुम्हारी शुभ घड़ियां
जिनमें पराधीन भारत मां
की खुल पाईं हथकड़ियां

भौतिक बल के दृढ़-विश्वासी
झुके आत्मबल के आगे
सत्य-अहिंसा के सम्बल से
भाग्य हमारे फिर जागे

उस बूढ़े तापस के तप का
जग में प्रकट प्रभाव हुआ
फिर स्वतन्त्रता देवी का
इस भू पर प्रादुर्भाव हुआ

नव सुषमा-युत कमला ने
सब स्वागत का सामान किया
कवि के मुख से स्वयं शारदा
ने था मंगल-गान किया

जय-जय की ध्वनि से गुंजित
नभ-मंडल भी था डोल उठा
नव जीवन पाकर भूतल का
कण-कण भी था बोल उठा

श्रद्धा से शत-शत प्रणाम
उन देश प्रेम-दीवानों को
अमर शहीद हुए जो कर
न्यौछावर अपने प्राणों को

कितने ही नवयुवक स्वत्व
समरांगण में खुलकर खेले
अत्याचारी उस डायर के
वार छातियों पर झेले

कितनों ने कारागृह में ही
जीवन का अवसान किया
अपने पावनतम सुध्येय पर
सुख से सब कुछ वार दिया

कितनों ने हंस कर फांसी को
चूमा, मुख से आह न की
सन्मुख अपने निश्चित पथ के
प्राणों की परवाह न की

अगणित मां के लाल हुए
बलिदान देश बलिवेदी पर
तब भारत माँ ने पाया
ये दिवस आज का अति सुखकर

पन्द्रह अगस्त का यह शुभ दिन
कभी न भूला जायेगा
स्वर्णाक्षर में अंकित होगा
उच्च अमर पद पायेगा आगे पढ़ें

15 अगस्त 1947 / शील

1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X