धर्मवीर भारती: तुम कितनी सुंदर लगती हो, जब तुम हो जाती हो उदास !

धर्मवीर भारती: तुम कितनी सुंदर लगती हो, जब तुम हो जाती हो उदास !
                
                                                             
                            तुम कितनी सुंदर लगती हो, जब तुम हो जाती हो उदास ! 
                                                                     
                            
ज्यों किसी गुलाबी दुनिया में, सूने खंडहर के आस-पास 
मदभरी चाँदनी जगती हो! 

मुँह पर ढक लेती हो आँचल, 
ज्यों डूब रहे रवि पर बादल। 

या दिन भर उड़ कर थकी किरन, 
सो जाती हो पाँखें समेट, आँचल में अलस उदासी बन; 

दो भूले-भटके सांध्य विहग 
पुतली में कर लेते निवास। 
तुम कितनी सुंदर लगती हो, जब तुम हो जाती हो उदास!  आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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