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दयानन्द पाण्डेय कविता: काश कि मैं दुनिया की सारी बेटियों का पिता होता

आज का शब्द
                
                                                                                 
                            काश कि कोई लड़की आए
                                                                                                

आए और मुझ से लिपट कर
मुझे प्यार से चूम ले
ऐसे जैसे मेरी बेटी स्कूल से लौटते ही
अपना बैग पटक कर, दौड़ कर, मुझ से लिपट कर
मुझे चूम लेती है और आहिस्ता से बोलती है पापा !
मैं झूम-झूम जाता हूं उस के इस अबोध प्यार में 
दुनिया के सारे सुख मेरे मन में समा जाते हैं 
वह उस का निश्छल चूमना
एक अलौकिक सुख में डुबो देता है 

लड़कियों को लड़की की तरह नहीं
बेटी की तरह देखिए
लड़कियां और सुंदर हो जाएंगी
आप की दुनिया और सुंदर हो जाएगी 
इस लिए कि बेटियां दुनिया की सब से सुंदर नेमत हैं

इस लिए कि बेटियां मुकम्मल होती हैं
उन में कोई कमी नहीं होती 
आप आती -जाती अपरिचित लड़कियों को
एक बार बेटी संबोधित कर के तो देखिए
बेटी की नज़र से देख कर तो देखिए 
आप के भीतर हजारों फूल खिल जाएंगे आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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