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Hindi Poetry: चंद्रकांत देवताले की कविता- माँ ने मुझे जन्म दिया और जीवन के सुपुर्द कर दिया

कविता
                
                                                                                 
                            माँ ने मुझे जन्म दिया 
                                                                                                

और जीवन के सुपुर्द कर दिया 
पिता ने शब्द दिए 
और सड़क पर छोड़कर 
आकाश की तरफ़ देखने लगे 
मैंने अपने को कविता के हवाले किया 
पिता आकाश में क्या ढूँढ़ रहे सोचते 
हवा की सीढ़ी पर चढ़ने लगे 

कानों में आवाज़ आई 
माँ की थी 
धरती पर! धरती पर ढूँढ़ो 
दुख की जड़ें यहीं हैं 
जिससे घबराए बाप तुम्हारे 
तकते हैं आसमान 

तो उतरने लगा नीचे 
दरारों और पत्थरों वाली धरती पर पाँव रखते ही 
सुना मैंने सीढ़ी मत गिरना 
सीढ़ी मत गिरना 
धरती ही की फुसफुसाहट थी 
जब माँस चढ़ जाएगा मेरी हड्डियों पर 
गाने लग जाएँगी मेरी बेटियाँ 
नहीं होंगे ये तंबू, ये गुंबद ज़ुल्म-ज़्यादती के 
तक काम आएँगी ये सीढ़ियाँ 
अपनी माँ की दुनिया के आगे भी है नक्षत्रों की सुंदर दुनिया  आगे पढ़ें

2 months ago

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