भगवतीचरण वर्मा: आज शाम है बहुत उदास, केवल मैं हूँ अपने पास

कविता
                
                                                             
                            आज शाम है बहुत उदास
                                                                     
                            
केवल मैं हूँ अपने पास ।

दूर कहीं पर हास-विलास
दूर कहीं उत्सव-उल्लास
दूर छिटक कर कहीं खो गया
मेरा चिर-संचित विश्वास ।

कुछ भूला सा और भ्रमा सा
केवल मैं हूँ अपने पास
एक धुन्ध में कुछ सहमी सी
आज शाम है बहुत उदास ।

एकाकीपन का एकान्त
कितना निष्प्रभ, कितना क्लान्त । आगे पढ़ें

1 month ago

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