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आलोक धन्वा: हर भले आदमी की एक रेल होती है

aalok dhanwa hindi kavita har bhale aadmi ki ek rail hoti hai
                
                                                                                 
                            

हर भले आदमी की एक रेल होती है


जो माँ के घर की ओर जाती है
सीटी बजाती हुई
धुआँ उड़ाती हुई।

साभार - कविताकोश 

1 month ago

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