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उदय प्रकाश

इरशाद

उदय प्रकाश : एक अकेले का गाना...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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धन्य प्रिया तुम जागीं, 
ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं। 

जीवन नदिया, बैरी केवट, पार न कोई अपना 
घाट पराया, देस बिराना, हाट-बाट सब सपना । 
क्या मन की, क्या तन की, किहनी अपनी अंसुअन पागी । 

दाना-पानी, ठौर ठिकाना, कहां बसेरा अपना 
निस दिन चलना, पल-पल जलना, नींद भई इक छलना । 
पाखी रूख न पाएं, अंखियां बरस-बरस की जागी । 

प्रेम न सांचा, शपथ न सांचा, सांच न संग हमारा 
एक सांस का जीवन सारा, बिरथा का चौबारा । 
जीवन के इस पल फिर तुम क्यों जनम-जनम की लागीं । 

धन्य प्रिया तुम जागीं, 
ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं ।



साभार- कविताकोश 

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