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Tahir Faraz famous ghazal chand lamhat ki khushi ke lie log barson udas rahte hain

इरशाद

चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए लोग बरसों उदास रहते हैं: ताहिर फ़राज़

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जो शजर बे-लिबास रहते हैं 
उन के साए उदास रहते हैं 

चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए 
लोग बरसों उदास रहते हैं 

इत्तिफ़ाक़न जो हँस लिए थे कभी 
इंतिक़ामन उदास रहते हैं 

मेरी पलकें हैं और अश्क तिरे 
पेड़ दरिया के पास रहते हैं 

उन के बारे में सोचिए 'ताहिर' 
जो मुसलसल उदास रहते हैं 
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