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लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको: सोम ठाकुर

इरशाद

लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको: सोम ठाकुर

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको
नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है।

आज बिसराकर तुम्हें कितना दुखी मन यह कहा जाता नहीं है
मौन रहना चाहता, पर बिन कहे भी अब रहा जाता नहीं है
मीत! अपनों से बिगड़ती है बुरा क्यों मानती हो?
लौट आओ प्राण! पहले प्यार की सौगंध तुमको
प्रीति का बचपन निमंत्रण दे रहा है। आगे पढ़ें

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