लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको: सोम ठाकुर

लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको: सोम ठाकुर
                
                                                             
                            लौट आओ मांग के सिंदूर की सौगंध तुमको
                                                                     
                            
नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है।

आज बिसराकर तुम्हें कितना दुखी मन यह कहा जाता नहीं है
मौन रहना चाहता, पर बिन कहे भी अब रहा जाता नहीं है
मीत! अपनों से बिगड़ती है बुरा क्यों मानती हो?
लौट आओ प्राण! पहले प्यार की सौगंध तुमको
प्रीति का बचपन निमंत्रण दे रहा है। आगे पढ़ें

1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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