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seemab akbarabadi ghazal ab kya bataun main tere milne se

इरशाद

सीमाब अकबराबादी: अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला 
इर्फ़ान-ए-ग़म* हुआ मुझे, दिल का पता मिला     *(ज्ञान)

जब दूर तक न कोई फ़कीर-आश्ना मिला, 
तेरा नियाज़-मन्द* तेरे दर से जा मिला             *(चाहने वाला)

मन्ज़िल मिली, मुराद मिली मुद्द'आ मिला, 
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक़्श-ए-पा मिला    

या ज़ख़्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे, 
या ऐतराफ़* कर कि निशान-ए-वफ़ा मिला       *(स्वीकार)

"सीमाब" को शगुफ़्ता न देखा तमाम उम्र, 
कमबख़्त जब मिला हमें कम-आश्ना मिला 


साभार- कविताकोश
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