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हरिवंशराय बच्चन: हलाहल के दस पद

इरशाद

हरिवंशराय बच्चन: हलाहल के दस पद 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1619 Views
1-
हलाहल पीना है तो देख 
न आगे क्या होगा परिणाम 
नहीं मुख से बोले अपशब्द 
पिया जब तूने मधु का जाम 

हुई मदिरा कुछ से कुछ और 
मिला जब उसको तेरा स्नेह 
हलाहल के प्याले को देख 
तुझे क्यों अपने पर संदेह 

2-

हलाहल में न बंटाया भाग
नहीं मैं इस पर धुनता माथ 
न पाये मुझको तुम पहचान 
रहे यद्यपि इतने दिन साथ 

सुरा अपने हिस्से की दान 
तुम्हें कर देता था सुखमान
तुम्हारे हाथों से मैं छीन 
मगर कर जाता विष का पान आगे पढ़ें

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