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सावन की बूंदें और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता: घर की याद

इरशाद

सावन की बूंदें और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता: घर की याद

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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आज पानी गिर रहा है,
बहुत पानी गिर रहा है,
रात भर गिरता रहा है,
प्राण मन घिरता रहा है,

अब सवेरा हो गया है,
कब सवेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना,
बहुत सोकर सिर्फ माना-

क्योंकि बादल की अँधेरी,
है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब,
रातवाली छाप है सब, आगे पढ़ें

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