सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता: कुमार गंधर्व का गायन सुनते हुए 

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
                                दूर-दूर तक
सोई पड़ी थीं पहाड़ियाँ
अचानक टीले करवट बदलने लगे
जैसे नींद में उठ चलने लगे ।

एक अदृश्य विराट हाथ बादलों-सा बढ़ा
पत्थरों को निचोड़ने लगा
निर्झर फूट पड़े
फिर घूमकर सब कुछ रेगिस्तान में
बदल गया ।

शान्त धरती से
अचानक आकाश चूमते
धूल भरे बवण्डर उठे
फिर रंगीन किरणों में बदल
धरती पर बरस कर शान्त हो गए । आगे पढ़ें

3 days ago
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