कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए: सलीम कौसर

कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए: सलीम कौसर
                
                                                             
                            कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए 
                                                                     
                            
वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए 

दिए की लौ से छलकता है उस के हुस्न का अक्स 
सिंगार करते हुए आईना सजाते हुए 

अब इस जगह से कई रास्ते निकलते हैं 
मैं गुम हुआ था जहाँ रास्ता बताते हुए 

पुकारते हैं उन्हें साहिलों के सन्नाटे 
जो लोग डूब गए कश्तियाँ बनाते हुए  आगे पढ़ें

22 hours ago
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