ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा: साहिर लुधियानवी

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा: साहिर लुधियानवी
                
                                                             
                            ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा 
                                                                     
                            
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा 

जिस तरह से थोड़ी सी तिरे साथ कटी है 
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा 

दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या 
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा 

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है 
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा 
1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X