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इरशाद

आप क्यों हमसे 'खफा' रहते हैं?

Sachin Gupta

2 कविताएं

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आप क्यों हमसे 'खफा' रहते हैं,
रिश्ते पहले से कहं रहते हैं।

ज़िस्म है एक दिन तो ढलना था
दिल के जज़्बात जवां रहते हैं l

एे ज़िन्दगी कभी ले चल
तू एक पल तो वहां l
मेरे सपने जहां पे रहते है l

हमने हर हसरतों को मारा है l
लोग फिर भी खफा से रहते हैं l

वो मेरे साथ मेरे पास तो है l
फिर भी क्यूं हम जुदा से रहते है l

- सचिन गुप्ता

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