मुहब्बत बहार की फूलों की तरह

romantic poem related to renowned actress meena kumari
                
                                                             
                            
मुहब्बत बहार की फूलों की तरह
मुहब्बत बहार की फूलों की तरह मुझे अपने जिस्म के रोएं-रोएं से 
फूटती मालूम हो रही है 
मुझे अपने आप पर एक 
ऐसे बजरे का गुमान हो रहा है जिसके रेशमी बादबान 
तने हुए हों और जिसे 
पुरअसरार हवाओं के झोंके 
आहिस्ता-आहिस्ता दूर-दूर 
पुर सुकून झीलों 
रोशन पहाड़ों और 
फूलों से ढके हुए गुमनाम जंंजीरों 
की तरफ लिए जा रहे हों 
वह और मैं 
जब खामोश हो जाते हैं तो हमें 
अपने अनकहे, अनसुने अल्फाज में 
जुगनुओं की मानिंद रह रहकर चमकते दिखाई देते हैं 
हमारी गुफ्तगू की जबान 
वही है जो 
दरख्तों, फूलों, सितारों और आबशारों की है 
यह घने जंगल 
और तारीक रात की गुफ्तगू है जो दिन निकलने पर 
अपने पीछे 
रोशनी और शबनम के आंसु छोड़ जाती है, महबूब 
आह मुहब्बत!
3 years ago

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