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Ramdhari singh dinkar hindi kavita kavi ki mrityu

इरशाद

रामधारी सिंह दिनकर की रचना 'कवि की मृत्यु'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जब गीतकार मर गया, चांद रोने आया,
चांदनी मचलने लगी कफ़न बन जाने को।
मलयानिल ने शव को कन्धों पर उठा लिया,
वन ने भेजे चन्दन-श्रीखण्ड जलाने को।

सूरज बोला, यह बड़ी रोशनीवाला था,
मैं भी न जिसे भर सका कभी उजियाली से
रंग दिया आदमी के भीतर की दुनिया को
इस गायक ने अपने गीतों की लाली से।

बोला बूढ़ा आकाश ध्यान जब यह धरता,
मुझ में यौवन का नया वेग जग जाता था।
इस के चिन्तन में डुबकी एक लगाते ही,
तन कौन कहे, मन भी मेरा रंग जाता था। आगे पढ़ें

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