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Qateel shifai ghazal apne hothon par sajana chahta hoon

इरशाद

क़तील शिफ़ाई की मशहूर ग़ज़ल 'अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने होंटों पर सजाना चाहता हूँ
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ

कोई आँसू तेरे दामन पर गिरा कर
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ

थक गया मैं करते करते याद तुझ को
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ

छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा
रौशनी को, घर जलाना चाहता हूँ

आख़री हिचकी तिरे ज़ानू पे आए
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ

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