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बैठा नदी के पास यही सोचता रहा: पवन कुमार

इरशाद

बैठा नदी के पास यही सोचता रहा: पवन कुमार

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बैठा नदी के पास यही सोचता रहा
कैसे बुझाऊँ प्यास यही सोचता रहा

शादाब वादियों में वो सूखा हुआ दरख़्त
कितना था बेलिबास यही सोचता रहा

कितने लगे हैं घाव मैं करता रहा शुमार
कितना हुआ उदास यही सोचता रहा आगे पढ़ें

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