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नागार्जुन

इरशाद

कांच की चार गुलाबी चूड़ियां : नागार्जुन

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ,
सात साल की बच्ची का पिता तो है!
सामने गियर से उपर
हुक से लटका रक्खी हैं
कांच की चार चूड़ियां गुलाबी आगे पढ़ें

लाख कहता हूं नहीं मानती मुनिया

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