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munawwar rana ghazal nahin hoti agar barish toh patthar ho gaye hote

इरशाद

नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते - मुनव्वर राना

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते
ये सारे लहलहाते खेत बंजर हो गए होते

तेरे दामन से सारी शहर को सैलाब से रोका
नहीं तो मैरे ये आंसू समन्दर हो गए होते

तुम्हें अहले सियासत ने कहीं का भी नहीं रक्खा
हमारे साथ रहते तो सुख़नवर हो गए होते

अगर आदाब कर लेते तो मसनद मिल गई होती
अगर लहजा बदल लेते गवर्नर हो गए होते
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