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Moin ahsan jazbi ghazal marne ki duaein kyun mangu

इरशाद

मरने की दुआएं क्यूं मांगूं जीने की तमन्ना कौन करे - मुईन अहसन जज़्बी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मरने की दुआएं क्यूं मांगूं जीने की तमन्ना कौन करे
ये दुनिया हो या वो दुनिया अब ख़्वाहिश-ए-दुनिया कौन करे

जो आग लगाई थी तुम ने उस को तो बुझाया अश्कों ने
जो अश्कों ने भड़काई है उस आग को ठंडा कौन करे

जब कश्ती साबित-ओ-सालिम थी साहिल की तमन्ना किस को थी
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर साहिल की तमन्ना कौन करे

दुनिया ने हमें छोड़ा 'जज़्बी' हम छोड़ न दें क्यूं दुनिया को
दुनिया को समझ कर बैठे हैं अब दुनिया दुनिया कौन करे

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