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Mohammad asadullah nazm dilon mein pyar jagane ko eid aayi hai

इरशाद

दिलों में प्यार जगाने को ईद आई है, हंसो कि हंसने हंसाने को ईद आई है - मोहम्मद असदुल्लाह

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दिलों में प्यार जगाने को ईद आई है
हंसो कि हंसने हंसाने को ईद आई है

मसर्रतों के ख़ज़ाने दिए ख़ुदा ने हमें
तराने शुक्र के गाने को ईद आई है

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुश्बू से
चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

ख़ोशा कि शीर-ओ-शकर हो गए गले मिल कर
ख़ुलूस-ए-दिल ही दिखाने को ईद आई है

उठा दो दोस्तो इस दुश्मनी को महफ़िल से
शिकायतों के भुलाने को ईद आई है

किया था अहद कि ख़ुशियां जहां में बांटेंगे
इसी तलब के निभाने को ईद आई है

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