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मिर्ज़ा ग़ालिब की 2 चुनिंदा ग़ज़लें....

इरशाद

मिर्ज़ा ग़ालिब की 2 चुनिंदा ग़ज़लें....

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही 
मेरी वहशत तिरी शोहरत ही सही 

क़त्अ कीजे न तअल्लुक़ हम से 
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही 

मेरे होने में है क्या रुस्वाई 
ऐ वो मज्लिस नहीं ख़ल्वत ही सही 

हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने 
ग़ैर को तुझ से मोहब्बत ही सही  आगे पढ़ें

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