मेरा सजल मुख देख लेते, यह करुण मुख देख लेते - महादेवी वर्मा

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मेरा सजल मुख देख लेते
यह करुण मुख देख लेते

सेतु शूलों का बना बांधा विरह-वारिश का जल
फूल की पलकें बनाकर प्यालियां बांटा हलाहल

दुखमय सुख
सुख भरा दुःख
कौन लेता पूछ, जो तुम,
ज्वाल-जल का देश देते।

नयन की नीलम-तुला पर मोतियों से प्यार तोला,
कर रहा व्यापार कब से मृत्यु से यह प्राण भोला।

भ्रान्तिमय कण
श्रान्तिमय क्षण-
थे मुझे वरदान, जो तुम
मांग ममता शेष लेते।

पद चले, जीवन चला, पलकें चली, स्पन्दन रही चल
किन्तु चलता जा रहा मेरा क्षितिज भी दूर धूमिल।

अंग अलसित
प्राण विजड़ित
मानती जय, जो तुम्हीं
हंस हार आज अनेक देते।

घुल गई इन आंसुओं में देव, जाने कौन हाला,
झूमता है विश्व पी-पी घूमती नक्षत्र-माला।

साध है तुम
बन सघन तुम
सुरंग अवगुण्ठन उठा,
गिन आंसुओं की रख लेते।

शिथिल चरणों के थकित इन नूपुरों की करुण रुनझून
विरह की इतिहास कहती, जो कभी पाते सुभग सुन;

चपल पद धर
आ अचल उर!
वार देते मुक्ति, खो
निर्वारण का सन्देश देते।

1 month ago
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