आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   mahadevi verma hindi kavita jab yah deep thake tab aana
mahadevi verma hindi kavita jab yah deep thake tab aana

इरशाद

जब यह दीप थके तब आना - महादेवी वर्मा की दीपशिखा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

804 Views

जब यह दीप थके तब आना

यह चंचल सपने भोले हैं,
दृगजल पर पाले मैंने मृदु,
पलकों पर तोले हैं
दे सौरभ से पंख इन्हें सब नयनों में पहुँचाना

साधें करुणा-अंक ढलीं हैं,
सांध्य गगन सी रंगमयी पर
पावस की सजला बदली हैं,
विद्युत के दे चरण इन्हें उर-उर की राह बताना

यह उड़ते क्षण पुलक भरे हैं,
सुधि से सुरभित स्नेह-धुले,
ज्वाला के चुम्बन से निखरे हैं,
दे तारों के प्राण इन्हीं से सूने श्वास बसाना!

यह स्पंदन हैं अंक व्यथा के 
चिर उज्ज्वल अक्षर जीवन की,
बिखरी विस्मृत क्षार-कथा के,
कण का चल इतिहास इन्हीं से लिख-लिख अजर बनाना

लौ ने वर्ती को जाना है,
वर्ती ने यह स्नेह, स्नेह ने
रज का अंचल पहचाना है,
चिर बन्धन में बांध इन्हें घुलने का वर दे जाना!


साभार - कविताकोश 

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!