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कुंवर नारायण: उस प्यार में कुंठा न थी, तुम आग जिसमें भर गए

इरशाद

कुंवर नारायण: उस प्यार में कुंठा न थी, तुम आग जिसमें भर गए

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वह चित्र भी झूठा नहीं : 
तब प्रेम बचपन ही सही
संसार ही जब खेल था,
तब दर्द था सागर नहीं,
लहरों बसा उद्वेल था;

पर रंग वह छूटा नहीं  
उस प्यार में कुंठा न थी
तुम आग जिसमें भर गए,
तुम वह जहाँ कटुता न थी
उस खेल में छल कर गए आगे पढ़ें

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