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Javed akhtar ghazal ghum hote hain jahan jahanat hoti hai

इरशाद

जावेद अख़्तर के तरकश से निकली ग़ज़ल...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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ग़ुम होते हैं जहाँ ज़हानत होती है
दुनिया में हर शय की कीमत होती है 

अकसर वो कहते हैं वो बस मेरे हैं
अकसर क्यों कहते हैं हैरत होती है

तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे
अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है

अपनी महबूबा में अपनी माँ देखें
बिन माँ के लड़कों की फ़ितरत होती है 

इक कश्ती में एक क़दम ही रखते हैं।
कुछ लोगों की ऐसी आदत होती है

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