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jamaal ehsani ghazal wo log mere bahut pyar karne wale the

इरशाद

तमाम रात नहाया था शहर बारिश में, वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे - जमाल एहसानी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वो लोग मेरे बहुत प्यार करने वाले थे
गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे

नई रुतों में दुखों के भी सिलसिले हैं नए
वो ज़ख़्म ताज़ा हुए हैं जो भरने वाले थे

ये किस मक़ाम पे सूझी तुझे बिछड़ने की
कि अब तो जा के कहीं दिन संवरने वाले थे

हज़ार मुझ से वो पैमान-ए-वस्ल करता रहा
पर उस के तौर-तरीक़े मुकरने वाले थे

तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे

उस एक छोटे से क़स्बे पे रेल ठहरी नहीं
वहां भी चंद मुसाफ़िर उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी 

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