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जयशंकर प्रसाद की कामायनी भाग-2 से लज्जा

इरशाद

जयशंकर प्रसाद की कामायनी भाग-2 से लज्जा 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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"फूलों की कोमल पंखुडियाँ
बिखरें जिसके अभिनंदन में।
मकरंद मिलाती हों अपना
स्वागत के कुंकुम चंदन में।

कोमल किसलय मर्मर-रव-से
जिसका जयघोष सुनाते हों।
जिसमें दुख-सुख मिलकर
मन के उत्सव आनंद मनाते हों।

उज्ज्वल वरदान चेतना का
सौंदर्य जिसे सब कहते हैं।
जिसमें अनंत अभिलाषा के
सपने सब जगते रहते हैं। आगे पढ़ें

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