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गोपाल सिंह नेपाली: हिंदी है भारत की बोली, तो अपने आप पनपने दो

इरशाद

गोपाल सिंह नेपाली: हिंदी है भारत की बोली, तो अपने आप पनपने दो

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दो वर्तमान का सत्य सरल,
सुंदर भविष्य के सपने दो
हिंदी है भारत की बोली
तो अपने आप पनपने दो

यह दुखड़ों का जंजाल नहीं,
लाखों मुखड़ों की भाषा है
थी अमर शहीदों की आशा,
अब जिंदों की अभिलाषा है
मेवा है इसकी सेवा में,
नयनों को कभी न झंपने दो
हिंदी है भारत की बोली
तो अपने आप पनपने दो आगे पढ़ें

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